Tuesday, 15 April 2014

मधुमेह

मधुमेह (DIABETES)
मधुमेह शरीर में चयापचय के विकृत होने से उत्पन्न बीमारी है जिसमें पेशाब में शर्करा आने लगता है क्योंकि शरीर के खून में शर्करा बढ़ जाती है। यह बीमारी स्त्री एवं पुरुष सभी में समान रूप से पायी जाती।
चरक ने मूत्र एवं शरीर में शर्करा के आधिक्य को मधुमेह कहा है।

मधुमेह के कारण

•    मधुमेह का प्रमुख कारण अग्न्याशय की विकृति है जो आहार-विहार में गड़बड़ी के कारण उत्पन्न होती है।
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आहार में मधुर, अम्ल एवं लवण रसों के अत्यधिक सेवन से। 
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आराम-तलब जीवन व्यतीत करने से तथा व्यायाम एवं परिश्रम न करने से। 
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अत्यधिक चिन्ता एवं उद्वेग के परिणामस्वरूप।
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आवश्यकता से अधिक कैलोरी वाले शर्करा एवं स्नेहयुक्त भोजन करने से यह रोग उत्पन्न होता है।
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आधुनिक वैज्ञानिकों ने इस व्याधि का संबंध वंश-परम्परा से भी माना है। हालाँकि की चरक भी इसका अनुमोदन करते हैं।

मधुमेह के लक्षण

मधुमेह पीड़ित व्यक्तियों में निम्न लक्षण दृष्टिगोचर होते हैं-
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रोगी का मुँह खुश्क रहना तथा अत्यधिक प्यास लगना।
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भूख अधिक लगना।
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अधिक भोजन करने पर भी दुर्बल होते जाना।
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बिना कारण रोगी का भार कम होना, शरीर में थकावट के साथ-साथ मानसिक चिन्तन एवं एकाग्रता में कमी होना।
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मूत्र बार-बार एवं अधिक मात्रा में होना तथा मूत्र त्यागने के स्थान पर मूत्र की मिठास के कारण चीटियाँ लगना।
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शरीर में व्रण अथवा फोड़ा होने पर उसका घाव जल्दी न भरना।
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शरीर पर फोड़े-फुँसियाँ बार-बर निकलना।
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शरीर में निरन्तर खुजली रहना एवं दूरस्थ अंगों का सुन्न पड़ना।
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नेत्र की ज्योति बिना किसी कारण के कम होना।
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पुरुषत्वशक्ति में क्षीणता होना। 
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स्त्रियों में मासिक स्राव में विकृति अथवा उसका बन्द होना।

उपचार

•    जो व्यक्ति कुछ दिनों तक रोजाना 7 बेल की पत्तियों का (एक पत्ती में 3 पत्र होते हैं) तथा एक चम्मच ताजे आँवले का तथा एक चम्मच जामुन के पत्रों का रस आपस में मिलाकर पीता है (केवल सुबह के समय) उसके शरीर में शर्करा का पाचन होने लगता है।

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बेलपत्र स्वरस एवं निंबपत्र कोपल स्वरस 10-10 मि.ली. प्रात: व शाम लेने से मधुमेह रोग बहुत जल्दी नियंत्रित होता है। 
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मैथी के बीज का चूर्ण 20 ग्राम प्रात: व शाम जल से लेने से लाभ होता है।
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जामुन के बीज का चूर्ण 20 ग्राम या करेले का रस 20 मि.ली. प्रात: व शाम को लेवें।
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गुड़मार के पत्तों एवं गूलर के पत्तों का चूर्ण या स्वरस प्रात: व शाम लेना इस रोग में हितकर है।
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शुद्ध शिलाजीत 1 ग्राम प्रात: व शाम दूध से लेने से भी मधुमेह ठीक होता है।
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मधुमेह के रोगी को रोजाना सुबह के समय एक चम्मच भर तेजपात का चूर्ण फाँकना परम लाभदायक होता है। इससे शर्करा नियंत्रित रहती है।

मधुमेह पर विशेष उपचार

•    बिल्वपत्र की 7 पत्तियाँ (एक पत्ती=3 पत्तियाँ) एवं 5 काली मिर्च पीसकर सुबह के समय जल से खाली पेट 1 माह तक लेने से मधुमेह काफी सीमा तक दूर हो जाता है।

मधुमेह के रोगी क्या करें

•     चिन्ता, तनाव, व्यग्रता से मुक्त रहें।
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तीन माह में एक बार रक्त शर्करा की जाँच करावें।
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भोजन कम करें, भोजन में रेशे युक्त द्रव्य, तरकारी, जौ, चने, गेहूँ, बाजरे की रोटी, हरी सब्जी एवं दही का प्रचुरमात्रा में सेवन करें। चना और गेहूँ मिलाकर उसके आटे की रोटी खाना बेहतर है। चना तथा गेहूँ का अनुपात 1:10 हो।
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हल्का व्यायाम करें, शारीरिक परिश्रम करें अथवा प्रात: 4-5 कि.मी. घूमें।
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मधुमेह पीड़ित मनुष्य नियमित एवं संयमित जीवन के लिये विशेष ध्यान रखें।
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शर्करीय पदार्थों का सेवन बहुत सीमित करें। 
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स्थूल तथा अधिक भार वाले व्यक्ति अपना वजन कम रखने का प्रयत्न करें।
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चरपरे एवं कषाय रसयुक्त आहार का विशेष सेवन करें।
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मैथुन यथासंभव कम करें एवं योग्य ब्रह्मचर्य धारण करें।
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दवाओं का सेवन चिकित्सक के परामर्श से ही करें।
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नित्य कुछ समय के लिये प्राणायाम अवश्य करना चाहिये। जहाँ तक संभव हो कुछ समय नंगे पैर जमीन पर अवश्य चलना, यदाकदा स्थान, जलवायु इत्यादि में भी बदलाव करें। शक्कर के स्तर की नियमित जाँच कराते रहें।

नोट- मधुमेह के रोगियों को सूर्य नमस्कारकरने से बहुत लाभ होता है। इस यौगिक क्रिया की जानकारी किसी भी योग्य जानकार से आसानी से हो जाती है। इसी लेखक और प्रकाशक की पुस्तक सब कुछ विचित्रमें सूर्य नमस्कार पर भरपूर प्रकाश डाला गया है।

मधुमेह के रोगी क्या न करें


•    अधिक मात्रा में कार्बोजयुक्त, शक्कर, आलू, शकरकन्द, केला, मीठे फल, आनूप देश के पशु व पक्षियों का मांस एवं चावल का सेवन न करें।
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क्रोध, शोक, चिन्ता, भय, वासनामय उद्वेग, मानसिक तनाव से बचें।
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गुण विरुद्ध, संयोग विरुद्ध, संस्कार विरुद्ध, काल विरुद्ध आहार-विहार से भी अपने आप को बचायें। 
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आराम-तलबी जीवन व्यतीत न करें। 
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मादक द्रव्यों, सिगरेट, बीड़ी, तम्बाकू, मदिरा आदि के सेवन से बचें।
•    
अत्यधिक परिश्रम न करें।
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नित्य भ्रमण पर जावें।

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